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अर्थव्यवस्था

EU छोटे पार्सल शुल्क का प्रभाव: क्या उम्मीद करें

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यूरोपीय संघ (EU) ने छोटे पार्सल पर एक नया शुल्क लागू किया है, जिसका उद्देश्य ई-कॉमर्स आयात को नियंत्रित करना है। यह शुल्क उन वस्तुओं पर लागू होगा जिनकी कीमत 150 यूरो से कम है, जो पहले शुल्क-मुक्त थीं। इस कदम से EU के बाहर से आने वाले छोटे पैकेजों की संख्या में कमी आने की उम्मीद है।

यह नीति मुख्य रूप से चीन जैसे देशों से सस्ते उत्पादों के आयात को लक्षित करती है, जो EU के खुदरा विक्रेताओं के लिए प्रतिस्पर्धा का कारण बन रहे थे। EU का मानना है कि यह शुल्क स्थानीय व्यवसायों को संरक्षित करेगा और कर राजस्व में वृद्धि करेगा। हालांकि, उपभोक्ताओं को अब अधिक भुगतान करना पड़ सकता है।

नए शुल्क के तहत, सभी आयातित पार्सल के लिए सीमा शुल्क घोषणा अनिवार्य होगी, भले ही उनका मूल्य कुछ भी हो। इससे डिलीवरी में देरी हो सकती है और प्रशासनिक लागत बढ़ सकती है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे अलीएक्सप्रेस और शीइन को अपने ग्राहकों के लिए अतिरिक्त शुल्क जोड़ने पड़ सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह नीति EU के डिजिटल बाजार को अधिक नियंत्रित करने की दिशा में एक कदम है। यह यूरोपीय संघ के भीतर ई-कॉमर्स को बढ़ावा दे सकता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकता है। कुछ देशों ने इस शुल्क की आलोचना की है, इसे संरक्षणवादी बताते हुए।

उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे ऑनलाइन खरीदारी करते समय अतिरिक्त शुल्कों को ध्यान में रखें। EU के नागरिकों को छोटे पार्सल के लिए अब अधिक भुगतान करना पड़ सकता है, जिससे खरीदारी की आदतों में बदलाव आ सकता है। यह नीति 2024 के मध्य से प्रभावी होगी।

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