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अडानी मामला: न्यायाधीश का सवाल प्रक्रियात्मक, मामला खारिज होने की संभावना बनी हुई है

The Print (Economy)
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न्यूयॉर्क के एक संघीय न्यायाधीश ने अरबपति गौतम अडानी के खिलाफ आपराधिक आरोपों को खारिज करने की अनुमति देने से पहले अभियोजकों से अधिक विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। यह कदम एक प्रक्रियात्मक आवश्यकता है और इसका मतलब यह नहीं है कि मामला आगे बढ़ने की संभावना है, ऐसा एक वरिष्ठ अमेरिकी वकील का कहना है।

अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) ने पिछले महीने अडानी और अन्य के खिलाफ आरोपों को खारिज करने का प्रस्ताव दिया था, जिसमें कथित तौर पर 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत योजना शामिल थी। हालांकि, न्यायाधीश ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देने से पहले अभियोजकों से अतिरिक्त जानकारी मांगी है। वकील के अनुसार, यह एक सामान्य प्रक्रिया है और इससे मामले के खारिज होने की संभावना प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

गौतम अडानी, जो अडानी समूह के संस्थापक हैं, पर अमेरिकी प्रतिभूति कानूनों के उल्लंघन और धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था। यह मामला भारत और अमेरिका के बीच कानूनी सहयोग से जुड़ा है, क्योंकि अडानी भारतीय नागरिक हैं। वकील का कहना है कि न्यायाधीश का सवाल केवल यह सुनिश्चित करने के लिए है कि खारिज करने का निर्णय उचित है।

इस मामले में अडानी के खिलाफ आरोपों में प्रतिभूति धोखाधड़ी और साजिश शामिल है। अमेरिकी नियामकों ने आरोप लगाया था कि अडानी और अन्य ने निवेशकों को धोखा देने के लिए भ्रष्टाचार योजना में शामिल होकर 265 मिलियन डॉलर जुटाए। हालांकि, DoJ ने बाद में मामले को खारिज करने का फैसला किया, जिससे कानूनी विशेषज्ञों में बहस छिड़ गई।

वकील ने कहा कि न्यायाधीश का प्रश्न प्रक्रियात्मक है और इससे मामले के खारिज होने की संभावना कम नहीं होती। उन्होंने कहा कि अदालतें अक्सर ऐसे मामलों में अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगती हैं, खासकर जब मामला हाई-प्रोफाइल हो। अंततः, DoJ के पास आरोपों को खारिज करने का अधिकार है, और न्यायाधीश का हस्तक्षेप केवल यह सुनिश्चित करने के लिए है कि प्रक्रिया का पालन किया गया है।

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