
जर्मनी में दो महत्वपूर्ण राज्य चुनावों से पहले, दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) की सह-नेता एलिस वीडेल ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने वादा किया है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो वह जर्मनी और रूस के बीच संबंधों को बहाल करेगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन युद्ध के कारण पश्चिमी देशों और रूस के बीच तनाव चरम पर है। वीडेल का यह रुख जर्मनी की मौजूदा विदेश नीति से बिल्कुल अलग है, जो रूस के खिलाफ प्रतिबंधों और यूक्रेन को सैन्य सहायता का समर्थन करती है।
एएफडी लंबे समय से रूस के प्रति सहानुभूति रखने के लिए जानी जाती रही है, और वीडेल का यह बयान पार्टी के इस रुख को और मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि जर्मनी को रूस के साथ आर्थिक और राजनयिक संबंधों को फिर से स्थापित करना चाहिए, खासकर ऊर्जा क्षेत्र में। यह बयान उन मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश है जो यूक्रेन युद्ध के कारण आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं और रूस के साथ शांति चाहते हैं।
हालांकि, वीडेल के इस बयान की जर्मनी की मुख्यधारा की पार्टियों और यूरोपीय संघ के नेताओं ने कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि रूस के साथ संबंध बहाल करने का मतलब यूक्रेन के खिलाफ आक्रामकता को स्वीकार करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि एएफडी का यह रुख जर्मनी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर सकता है और यूरोपीय एकता को कमजोर कर सकता है।
दो राज्यों, सैक्सोनी और ब्रैंडेनबर्ग में होने वाले चुनाव एएफडी के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा होंगे। पार्टी पूर्वी जर्मनी में विशेष रूप से मजबूत है, जहां रूस के प्रति सहानुभूति अधिक है। वीडेल का यह बयान इन क्षेत्रों में मतदाताओं को लुभाने की एक रणनीति हो सकती है। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर एएफडी की लोकप्रियता हाल के महीनों में कम हुई है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बयान चुनावी नतीजों को कैसे प्रभावित करता है।
कुल मिलाकर, वीडेल का यह बयान जर्मनी की विदेश नीति में एक बड़े बदलाव की संभावना को दर्शाता है, अगर एएफडी सत्ता में आती है। यह यूरोपीय संघ और नाटो के लिए भी एक चुनौती होगी, क्योंकि जर्मनी इन संगठनों का एक प्रमुख सदस्य है। फिलहाल, यह देखना बाकी है कि क्या यह बयान एएफडी को चुनावी लाभ दिलाएगा या इससे पार्टी को और अलग-थलग कर देगा।
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