ऑस्ट्रिया की दक्षिणपंथी पार्टी FPÖ और उसके सहयोगी मानव-निर्मित जलवायु परिवर्तन पर संदेह जताते हैं और जलवायु नीति उपायों का विरोध करते हैं। वे 'हिट्ज़ेपैनिक' (हीट पैनिक) और 'क्लिमा-कम्युनिज़्म' (जलवायु साम्यवाद) जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके जलवायु संकट को विकृत करते हैं। यह रणनीति जलवायु विज्ञान को कमजोर करने और सार्वजनिक समर्थन को कम करने के लिए बनाई गई है।
FPÖ का यह दृष्टिकोण न केवल वैज्ञानिक सहमति को चुनौती देता है, बल्कि जलवायु संरक्षण उपायों को अवास्तविक या अत्यधिक बताकर उन्हें बदनाम करने का प्रयास करता है। पार्टी के नेता अक्सर जलवायु नीतियों को आर्थिक विकास और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए खतरा बताते हैं। इस तरह की बयानबाजी उनके समर्थकों के बीच गूंजती है, जो पहले से ही पर्यावरण नियमों से असंतुष्ट हैं।
यह घटना केवल ऑस्ट्रिया तक सीमित नहीं है; दुनिया भर में दक्षिणपंथी समूह जलवायु परिवर्तन को नकारने या कम करने के लिए समान रणनीति अपनाते हैं। वे जलवायु विज्ञान को एक षड्यंत्र के रूप में चित्रित करते हैं और अंतरराष्ट्रीय जलवायु समझौतों का विरोध करते हैं। इससे जलवायु संकट से निपटने के वैश्विक प्रयासों में बाधा आती है।
FPÖ की रणनीति में मीडिया और सोशल मीडिया का उपयोग शामिल है, जहां वे गलत सूचना फैलाते हैं और जलवायु वैज्ञानिकों पर हमला करते हैं। वे 'हिट्ज़ेपैनिक' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके जलवायु चिंता को एक अतिरंजित प्रतिक्रिया के रूप में पेश करते हैं। इसी तरह, 'क्लिमा-कम्युनिज़्म' शब्द का उपयोग जलवायु नीतियों को साम्यवादी विचारधारा से जोड़ने के लिए किया जाता है।
इस विकृति का प्रभाव गंभीर है: यह जलवायु कार्रवाई के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति को कमजोर करता है और जनता को भ्रमित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की बयानबाजी से जलवायु संकट से निपटने में देरी होती है और भविष्य की पीढ़ियों के लिए खतरा बढ़ता है। FPÖ के इस दृष्टिकोण की आलोचना की जाती है, लेकिन यह उनके समर्थकों के बीच लोकप्रिय बना हुआ है।
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