दिल्ली सरकार ने मंजूर की ईवी नीति: 30 लाख रुपये तक की इलेक्ट्रिक कारों पर सड़क कर और पंजीकरण शुल्क में छूट

दिल्ली सरकार ने सोमवार को एक नई इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत राष्ट्रीय राजधानी में पंजीकृत 30 लाख रुपये या उससे कम की एक्स-शोरूम कीमत वाली सभी इलेक्ट्रिक कारों को सड़क कर और पंजीकरण शुल्क पर 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। यह नीति दिल्ली में प्रदूषण को कम करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाई गई है। इसके तहत ई-दोपहिया वाहन खरीदने वालों को भी लाभ मिलेगा, हालांकि उनके लिए विस्तृत नियम अलग से निर्धारित किए जाएंगे।
यह नीति दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार की ओर से एक बड़ा कदम है, जो पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का मानना है कि इस छूट से इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत काफी हद तक कम हो जाएगी, जिससे अधिक लोग इन्हें खरीदने के लिए प्रेरित होंगे। वर्तमान में दिल्ली में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या है, और पेट्रोल-डीजल वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए ईवी को एक प्रभावी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
नीति के अनुसार, 30 लाख रुपये तक की इलेक्ट्रिक कारों पर सड़क कर और पंजीकरण शुल्क पूरी तरह से माफ कर दिया जाएगा। इससे कारों की कुल लागत में काफी कमी आएगी, क्योंकि दिल्ली में सड़क कर आमतौर पर वाहन की कीमत का 8-12 प्रतिशत होता है। इसके अलावा, पंजीकरण शुल्क भी एक अतिरिक्त बोझ है जिसे हटा दिया गया है। यह छूट केवल उन वाहनों पर लागू होगी जो दिल्ली में पंजीकृत हैं, और इसका उद्देश्य शहर के भीतर ईवी की बिक्री को बढ़ावा देना है।
ई-दोपहिया वाहनों के लिए भी अलग से प्रोत्साहन की योजना है, हालांकि उनके लिए विस्तृत दिशानिर्देश अभी जारी नहीं किए गए हैं। सरकार ने संकेत दिया है कि वह ई-स्कूटर और ई-मोटरसाइकिलों के लिए भी इसी तरह की छूट या सब्सिडी पर विचार कर रही है। इसके अलावा, नीति में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर भी जोर दिया गया है, ताकि लोगों को ईवी चार्ज करने में कोई परेशानी न हो।
यह नीति दिल्ली को देश में इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने में अग्रणी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की छूट से ईवी की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है, खासकर मध्यम वर्ग के बीच जो कीमत के प्रति संवेदनशील हैं। हालांकि, कुछ आलोचकों का कहना है कि सरकार को चार्जिंग बुनियादी ढांचे पर अधिक ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इसके बिना ईवी को अपनाना मुश्किल होगा। फिर भी, यह नीति एक सकारात्मक संकेत है और उम्मीद है कि अन्य राज्य भी इसका अनुसरण करेंगे।
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