
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन ने अपनी पत्नी एमिन एर्दोआन के साथ सपांका में आयोजित एके पार्टी की 33वीं परामर्श और मूल्यांकन बैठक में भाग लिया। इस बैठक में उन्होंने हिजाब के मुद्दे पर स्पष्ट बयान दिया। उन्होंने कहा कि हिजाब पहनने वाली लड़कियां और महिलाएं अपने विश्वास के अनुसार ऐसा करती हैं। एर्दोआन ने इस बात पर जोर दिया कि यह उनका धार्मिक कर्तव्य है और इसे किसी भी तरह से प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि तुर्की में धार्मिक स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है और हिजाब पर कोई भी प्रतिबंध इस अधिकार का उल्लंघन होगा। उन्होंने पिछले सरकारों के दौरान हिजाब पर लगाए गए प्रतिबंधों की आलोचना की और कहा कि उनकी सरकार ने इन प्रतिबंधों को हटाने के लिए काम किया है। एर्दोआन ने यह भी कहा कि हिजाब पहनना महिलाओं का व्यक्तिगत निर्णय है और इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि तुर्की एक लोकतांत्रिक देश है जहां हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है। एर्दोआन ने इस बात पर जोर दिया कि हिजाब पहनने वाली महिलाओं को शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में समान अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने इस दिशा में कई कदम उठाए हैं, जिसमें विश्वविद्यालयों और सरकारी कार्यालयों में हिजाब पर प्रतिबंध हटाना शामिल है।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि हिजाब का मुद्दा केवल तुर्की तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर के मुस्लिम समुदायों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वह धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करे और हिजाब पहनने वाली महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को रोके। एर्दोआन ने कहा कि तुर्की इस मुद्दे पर एक मिसाल पेश कर रहा है और उम्मीद करता है कि अन्य देश भी इसका अनुसरण करेंगे।
अंत में, एर्दोआन ने कहा कि हिजाब पर उनकी सरकार का रुख स्पष्ट और अटल है। उन्होंने कहा कि वह किसी भी दबाव या आलोचना के बावजूद इस नीति को जारी रखेंगे। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि हिजाब पहनने वाली महिलाओं को तुर्की समाज में पूरी तरह से शामिल किया जाना चाहिए और उनके अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।
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