
ईरान में हाल ही में अमेरिका के साथ संघर्ष समाप्त होने के बाद तेहरान की सड़कों पर एक महिला की तस्वीर सामने आई है, जिसमें वह बिना हिजाब के, आत्मविश्वास से चलती दिख रही है। यह तस्वीर उस शासन के बदलते चेहरे को दर्शाती है जिसने कुछ महीने पहले महसा अमीनी जैसी महिलाओं को सिर्फ बाल दिखाने पर मार डाला था।
लेखक एर्तुगरुल ओज़्कोक ने इस तस्वीर का विश्लेषण करते हुए कहा है कि यह ईरानी शासन की एक नई प्रचार रणनीति है। शासन अब 'राष्ट्रीय एकता' का चित्र पेश करना चाहता है, जिसमें महिलाएं स्वतंत्र रूप से घूमती दिखें। यह उसी शासन की विडंबना है जिसने पहले ऐसी महिलाओं को 'भगवान का दुश्मन' कहा था।
ओज़्कोक ने न्यूयॉर्क टाइम्स के एक लेख का हवाला देते हुए सवाल उठाया है कि क्या सियासी इस्लाम कमजोर हो रहा है। उनके अनुसार, सुन्नी सियासी इस्लाम के केंद्र मुस्लिम ब्रदरहुड को सऊदी अरब, मिस्र और ट्यूनीशिया में झटका लगा है, और अब ईरान में शिया सियासी इस्लाम भी संकट में है।
तस्वीर में पृष्ठभूमि में मारे गए पूर्व धार्मिक नेता खामेनेई और उनके बेटे की तस्वीरें हैं, जो शासन के बदलाव का संकेत देती हैं। ओज़्कोक का कहना है कि यह तस्वीर दिखाती है कि ईरान सिर्फ मुल्लाओं का शासन नहीं है, बल्कि एक राष्ट्र बनने के लिए उसे सभी नागरिकों की स्वतंत्रता और स्वैच्छिक भागीदारी की आवश्यकता है।
अंत में, ओज़्कोक ने इस बात पर जोर दिया है कि ईरानी शासन अब एक नई छवि बनाने की कोशिश कर रहा है, जहां महिलाएं सड़कों पर स्वतंत्र रूप से घूम सकें। लेकिन यह सिर्फ एक दिखावा है, क्योंकि असली स्वतंत्रता अभी भी दूर है। यह तस्वीर सियासी इस्लाम के पतन का एक और संकेत है।
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