
फ्रांस में जीवन के अंत (fin de vie) से संबंधित एक नया कानून लंबे विधायी संघर्ष के बाद पारित होने की संभावना है। यह कानून मरीजों को गंभीर और लाइलाज बीमारियों के मामले में सक्रिय इच्छामृत्यु या चिकित्सक सहायता प्राप्त आत्महत्या का विकल्प दे सकता है। फ्रांस में इस मुद्दे पर दशकों से बहस चल रही है, और विभिन्न सरकारों ने इस पर काम किया है लेकिन अब तक कोई ठोस कानून नहीं बन पाया था।
वर्तमान विधेयक को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के प्रशासन ने आगे बढ़ाया है, जो इसे अपने कार्यकाल की एक प्रमुख सामाजिक सुधार के रूप में देखते हैं। इस कानून के तहत, मरीजों को अपनी इच्छा व्यक्त करने का अधिकार होगा, और डॉक्टरों को एक नैतिक ढांचे के तहत कार्य करना होगा। हालांकि, इस विधेयक का चिकित्सा पेशेवरों, धार्मिक समूहों और नैतिकतावादियों द्वारा विरोध किया जा रहा है, जो इसे जीवन के पवित्र सिद्धांत के खिलाफ मानते हैं।
फ्रांस में पहले से ही पैसिव इच्छामृत्यु (जीवन रक्षक उपचार वापस लेना) की अनुमति है, लेकिन सक्रिय इच्छामृत्यु अवैध है। नया कानून इस अंतर को पाटने का प्रयास करता है, जिससे मरीजों को अधिक नियंत्रण मिल सके। इस विधेयक के समर्थकों का तर्क है कि यह मानवीय गरिमा और स्वायत्तता का सम्मान करता है, जबकि विरोधी इसे नाजुक रोगियों पर दबाव डालने का एक साधन बताते हैं।
यह कानून फ्रांसीसी समाज में गहरे विभाजन को दर्शाता है, जहां धर्मनिरपेक्षता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मूल्यों के बीच तनाव है। सर्वेक्षणों से पता चलता है कि अधिकांश फ्रांसीसी नागरिक इच्छामृत्यु के कानूनीकरण का समर्थन करते हैं, लेकिन संसद में इस पर गरमागरम बहस होने की उम्मीद है।
अंततः, यह कानून फ्रांस को यूरोप के उन देशों की श्रेणी में ला सकता है जहां इच्छामृत्यु कानूनी है, जैसे नीदरलैंड, बेल्जियम और लक्जमबर्ग। हालांकि, इसके पारित होने की प्रक्रिया अभी भी अनिश्चित है, और इसे कई संशोधनों का सामना करना पड़ सकता है। फ्रांसीसी संसद में इस विधेयक पर मतदान आने वाले महीनों में होने की उम्मीद है।
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