
आईटीसी लिमिटेड ने अपने वित्त वर्ष 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में एक आक्रामक मध्यम अवधि की विकास रणनीति की रूपरेखा प्रस्तुत की है। यह रणनीति मुख्य रूप से एफएमसीजी व्यवसाय के विस्तार, डिजिटल कृषि को बढ़ावा देने, ताजा खाद्य और टिकाऊ पैकेजिंग व्यवसायों को विकसित करने पर केंद्रित है। कंपनी ने 2050 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य भी रखा है। यह विविध समूह भारत का सबसे बड़ा एफएमसीजी खिलाड़ी बनने की आकांक्षा रखता है।
आईटीसी का एफएमसीजी सेगमेंट पहले से ही कंपनी के राजस्व में सबसे बड़ा योगदानकर्ता है और इसे और मजबूत करने की योजना है। कंपनी नए उत्पाद लॉन्च करने, वितरण नेटवर्क का विस्तार करने और ब्रांड इक्विटी बढ़ाने पर ध्यान देगी। डिजिटल कृषि पहल के तहत, आईटीसी किसानों को तकनीकी समाधान प्रदान करेगी, जिससे उनकी उत्पादकता और आय में सुधार होगा। यह कदम कंपनी की आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूत करेगा।
ताजा खाद्य व्यवसाय में, आईटीसी अपने 'किचन ऑफ इंडिया' ब्रांड के तहत फल, सब्जियां और अन्य ताजा उत्पाद बेचने की योजना बना रही है। टिकाऊ पैकेजिंग पर ध्यान केंद्रित करके, कंपनी पर्यावरण के अनुकूल विकल्प विकसित करेगी और प्लास्टिक कचरे को कम करेगी। ये सभी पहल आईटीसी को एक जिम्मेदार कॉर्पोरेट नागरिक के रूप में स्थापित करने में मदद करेंगी।
2050 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य आईटीसी की दीर्घकालिक स्थिरता प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कंपनी नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश करेगी, ऊर्जा दक्षता में सुधार करेगी और कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए अन्य उपाय करेगी। यह रणनीति न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए भी फायदेमंद होगी।
आईटीसी की यह नई रणनीति भारतीय बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच आई है। कंपनी को नेस्ले, यूनिलीवर और पेप्सिको जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ता है। हालांकि, आईटीसी का मजबूत ब्रांड पोर्टफोलियो, व्यापक वितरण नेटवर्क और नवाचार पर ध्यान इसे प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देता है। कंपनी का मानना है कि यह रणनीति आने वाले वर्षों में सतत विकास सुनिश्चित करेगी।
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