
चीन के वुहान में स्थित वुहान विश्वविद्यालय के झोंगनान अस्पताल ने न्यूरोलॉजिकल पुनर्वास के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। एक 36 वर्षीय महिला रोगी, जिसका उपनाम हू है, को मस्तिष्क ट्यूमर (मेनिंजियोमा) की सर्जरी के बाद शरीर के बाएं हिस्से में पूर्ण लकवा (फ्लेसिड पैरालिसिस) हो गया था। इस नई गैर-आक्रामक ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) तकनीक की मदद से वह एक महीने से भी कम समय में फिर से अकेले चलने और सीढ़ियां चढ़ने में सक्षम हो गई। यह तकनीक सर्जिकल हस्तक्षेप के बिना काम करती है, जो इसे न्यूरालिंक जैसी आक्रामक विधियों से अलग बनाती है।
इस उपचार में इस्तेमाल किया गया सिस्टम पूरी तरह से खोपड़ी के बाहर से काम करता है। रोगी को वुहान यिरुइडे मेडिकल इक्विपमेंट कंपनी द्वारा विकसित "हैनब्रेन झीसिंग" नामक एक AI-संचालित प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया। उपचार के दौरान, रोगी ने एक EEG (इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी) हेडबैंड पहना और केवल अपने दिमाग में चलने, पैर उठाने या आगे बढ़ने की कल्पना की। सिस्टम में मौजूद उन्नत मोटर इरादा डिकोडिंग एल्गोरिदम ने मस्तिष्क के मोटर कॉर्टेक्स से इन मानसिक विद्युत संकेतों को रीयल-टाइम में कैप्चर किया और उन्हें रोगी के पैरों से जुड़े रोबोटिक एक्सोस्केलेटन को गति आदेश के रूप में भेजा।
अस्पताल के न्यूरोलॉजिकल रिहैबिलिटेशन विभाग के प्रमुख झांग शिन ने कहा कि यह तकनीक पारंपरिक पुनर्वास विधियों की तुलना में रिकवरी के समय को 50% से अधिक कम कर देती है। उन्होंने बताया कि यह प्रणाली मस्तिष्क और परिधीय तंत्रिकाओं के बीच टूटे हुए संबंध को एक डिजिटल पुल के माध्यम से फिर से स्थापित करती है। पारंपरिक उपचारों में रोगी निष्क्रिय प्राप्तकर्ता होते हैं, जबकि इस तकनीक में वे सीधे गति के आरंभकर्ता बन जाते हैं। इससे मस्तिष्क और मांसपेशियों के बीच सिंक्रनाइज़ेशन में सुधार होता है और रोगी की प्रेरणा बढ़ती है।
मई से इस BCI प्लेटफॉर्म का अस्पताल में सक्रिय रूप से नैदानिक उपयोग किया जा रहा है और अब तक लगभग 10 रोगियों के उपचार में सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है। यह प्रणाली विशेष रूप से मस्तिष्क सर्जरी के बाद होने वाली कार्यात्मक हानि, आंशिक लकवा (हेमिप्लेजिया) और रीढ़ की हड्डी की चोटों वाले रोगियों के लिए उम्मीद की किरण है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि प्रारंभिक परिणामों की पुष्टि के साथ, गैर-आक्रामक BCI दुनिया भर के लकवा पुनर्वास केंद्रों में एक मानक उपचार प्रोटोकॉल बन सकता है।
यह सफलता न केवल चीन में बल्कि वैश्विक स्तर पर न्यूरोलॉजिकल पुनर्वास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। गैर-आक्रामक BCI तकनीक के विकास से लाखों लकवाग्रस्त रोगियों को लाभ हो सकता है, जिनके पास सर्जिकल विकल्प नहीं हैं। यह तकनीक मस्तिष्क-कंप्यूटर इंटरफेस को अधिक सुलभ और सुरक्षित बनाती है, जिससे भविष्य में इसका व्यापक उपयोग संभव हो सकेगा।
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