
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूरोपीय संघ के भविष्य के बजट के वित्तपोषण के लिए 400 अरब यूरो के नए यूरोपीय करों का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव ब्रुसेल्स द्वारा प्रस्तावित 2,000 अरब यूरो के मेगा-बजट के वित्तपोषण में मदद करने के लिए है। पिछले यूरोपीय कराधान परियोजनाओं की विफलता के बाद, फ्रांस अब नए कर लगाने के लिए जमीन तैयार कर रहा है।
यह कदम यूरोपीय संघ के वित्तीय ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है, जहां सदस्य देशों के योगदान के अलावा नए कर स्रोतों की तलाश की जा रही है। मैक्रों का प्रस्ताव विशेष रूप से डिजिटल सेवाओं, वित्तीय लेनदेन और पर्यावरणीय करों पर केंद्रित हो सकता है। हालांकि, इस तरह के करों को लागू करने के लिए सभी 27 सदस्य देशों की सहमति आवश्यक है, जो एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।
पिछले प्रयासों में, डिजिटल सेवा कर और वित्तीय लेनदेन कर जैसे प्रस्तावों को सदस्य देशों के बीच मतभेदों के कारण सफलता नहीं मिली थी। फ्रांस अब इन असफलताओं से सीखते हुए एक नई रणनीति अपना रहा है। मैक्रों का मानना है कि यूरोपीय संघ को अपने बजट को मजबूत करने के लिए नए राजस्व स्रोतों की आवश्यकता है, खासकर कोविड-19 महामारी के बाद आर्थिक सुधार के मद्देनजर।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य यूरोपीय संघ की वित्तीय स्वायत्तता को बढ़ाना और सदस्य देशों पर बोझ कम करना है। हालांकि, कुछ देशों ने पहले ही इस विचार पर आपत्ति जताई है, इसे राष्ट्रीय संप्रभुता में हस्तक्षेप के रूप में देखते हुए। बहस आने वाले महीनों में तेज होने की संभावना है, क्योंकि यूरोपीय संघ अपने दीर्घकालिक बजट पर चर्चा कर रहा है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मैक्रों अपने साथी यूरोपीय नेताओं को इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए राजी कर पाएंगे। यदि सफल रहा, तो यह यूरोपीय संघ के वित्तपोषण में एक ऐतिहासिक बदलाव होगा, जो आने वाले दशकों के लिए ब्लॉक की वित्तीय नीति को आकार देगा।
इस खबर के बारे में पूछें
उत्तर केवल इस खबर से AI द्वारा।
यह एआई द्वारा बनाया गया संक्षिप्त सारांश है। पूरी खबर स्रोत पर है।
स्रोत पर पूरी खबर पढ़ेंatlantico.fr