
कहरामनमारस केंद्रित भूकंपों ने तुर्की के कई शहरों को तबाह कर दिया, जिनमें मालट्या और हताय सबसे अधिक प्रभावित हुए। इन दोनों शहरों में पुनर्निर्माण का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन अब तक पूरे किए गए आवासों की संख्या में बड़ा अंतर है। पर्यावरण, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और टीओकेआई के समन्वय से चल रही इस परियोजना के तहत, पूर्ण किए गए घरों को चरणबद्ध तरीके से हकदारों को सौंपा जा रहा है। भूकंप पीड़ित अब सुरक्षित और स्थायी आवासों में बस रहे हैं, लेकिन दोनों शहरों के बीच प्रगति की तुलना जनता में चर्चा का विषय बनी हुई है।
मालट्या में अब तक 63,615 आवास, 13,366 ग्रामीण गाँव के घर और 4,090 दुकानें सहित कुल 81,071 स्वतंत्र इकाइयों का लॉटरी निकालकर हकदारों को सौंपा जा चुका है। यह आंकड़ा सराहनीय है, लेकिन हताय की तुलना में काफी कम है। हताय, जो भूकंप से सबसे अधिक तबाह हुआ था, में अब तक 153,755 आवास, गाँव के घर और दुकानें पूरी होकर सौंपी जा चुकी हैं। यह संख्या मालट्या से लगभग दोगुनी है, जिससे जनता में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर दोनों शहरों के बीच इतना अंतर क्यों है।
इस अंतर के कारणों पर विशेषज्ञों का कहना है कि हताय में विनाश का स्तर अधिक था, इसलिए वहां पुनर्निर्माण को प्राथमिकता दी गई। साथ ही, हताय में भूकंप के बाद अंतरराष्ट्रीय सहायता और संसाधनों का अधिक प्रवाह हुआ। मालट्या में भी काम तेजी से चल रहा है, लेकिन वहां की भौगोलिक स्थिति और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों के कारण प्रगति धीमी रही है। फिर भी, दोनों शहरों में सरकार का लक्ष्य 2024 के अंत तक सभी पात्र लोगों को आवास उपलब्ध कराने का है।
जनता में इस तुलना को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ लोग हताय में तेजी से हुए पुनर्निर्माण की सराहना करते हैं, जबकि अन्य मालट्या में धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हैं। स्थानीय मीडिया में दोनों शहरों की तस्वीरों की तुलना की जा रही है, जिसमें हताय में नए भवनों की चमक दिखती है, जबकि मालट्या में अभी भी कई जगह मलबा बिखरा हुआ है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि मालट्या में भी जल्द ही काम की गति बढ़ाई जाएगी।
इस बीच, भूकंप पीड़ितों की मानसिक स्थिति पर भी ध्यान देने की जरूरत है। कई परिवार अभी भी अस्थायी आवासों में रह रहे हैं और उन्हें स्थायी घरों की प्रतीक्षा है। सरकारी एजेंसियां राहत सामग्री और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान कर रही हैं, लेकिन पुनर्वास की प्रक्रिया धीमी है। दोनों शहरों में पुनर्निर्माण के साथ-साथ सामुदायिक केंद्रों और स्कूलों जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी निर्माण किया जा रहा है, ताकि लोग सामान्य जीवन में लौट सकें।
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