मैकिन्से: चीन और यूरोप के बीच लागत अंतर को पाटने के लिए सरकारी हस्तक्षेप जरूरी

मैकिन्से नामक सलाहकार फर्म के एक नए अध्ययन के अनुसार, यूरोप में उत्पादन लागत चीन की तुलना में कई क्षेत्रों में काफी अधिक है। यह अंतर इतना बड़ा है कि महत्वाकांक्षी सुधार भी इसे पूरी तरह से पाटने में असमर्थ हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोपीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए सरकारों को हस्तक्षेप करना होगा।
यह अध्ययन विभिन्न उद्योगों में उत्पादन लागत की तुलना करता है, जिसमें ऑटोमोटिव, मशीनरी और रसायन शामिल हैं। मैकिन्से के विश्लेषण से पता चलता है कि चीन में श्रम लागत, ऊर्जा की कीमतें और विनियामक बोझ काफी कम हैं। यूरोप में, उच्च मजदूरी, सख्त पर्यावरण नियम और ऊर्जा की ऊंची कीमतें उत्पादन को महंगा बनाती हैं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि यूरोपीय संघ के भीतर भी लागत में भिन्नता है। पूर्वी यूरोपीय देशों में उत्पादन लागत पश्चिमी यूरोप की तुलना में कम है, लेकिन फिर भी चीन से अधिक है। मैकिन्से का सुझाव है कि यूरोपीय कंपनियों को अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं को फिर से डिजाइन करना चाहिए और अधिक कुशल उत्पादन विधियों को अपनाना चाहिए।
हालांकि, मैकिन्से का मानना है कि अकेले कॉर्पोरेट कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। सरकारों को नीतिगत हस्तक्षेप के माध्यम से लागत अंतर को कम करने में मदद करनी चाहिए। इसमें ऊर्जा की कीमतों को कम करना, विनियमों को सरल बनाना और अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाना शामिल हो सकता है।
अंत में, रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यदि यूरोप अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार नहीं करता है, तो वैश्विक बाजार में उसकी हिस्सेदारी घट सकती है। चीन के साथ लागत अंतर को पाटना एक दीर्घकालिक चुनौती है, जिसके लिए सरकारों और उद्योगों के बीच सहयोग की आवश्यकता होगी।
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