
चेक फुटबॉल संघ (FAČR) ने आज रात घोषणा की कि मिरोस्लाव कौबेक अब चेक गणराज्य की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के मुख्य कोच नहीं रहेंगे। यह निर्णय टीम के हालिया प्रदर्शन और भविष्य की योजनाओं के मद्देनजर लिया गया है। कौबेक ने 2021 से टीम का नेतृत्व किया था, लेकिन उनके कार्यकाल में टीम को मिश्रित परिणाम मिले।
चेक फुटबॉल संघ ने एक संक्षिप्त बयान में कहा कि यह फैसला आपसी सहमति से हुआ है। हालांकि, मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, टीम के खराब प्रदर्शन के कारण संघ ने यह कदम उठाया। कौबेक के नेतृत्व में चेक टीम ने 2022 विश्व कप क्वालीफिकेशन में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया था और यूरो 2024 क्वालीफिकेशन में भी संघर्ष कर रही थी।
कौबेक का कार्यकाल कई उतार-चढ़ाव भरा रहा। उन्होंने टीम में युवा खिलाड़ियों को शामिल करने पर जोर दिया, लेकिन परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। उनके अधीन चेक टीम ने 22 मैच खेले, जिनमें से 10 जीते, 6 ड्रॉ रहे और 6 हारे। यह आंकड़ा संघ के लिए संतोषजनक नहीं था, खासकर जब टीम को बड़े टूर्नामेंटों के लिए क्वालीफाई करना था।
अब चेक फुटबॉल संघ नए कोच की तलाश शुरू करेगा। संभावित उम्मीदवारों में कुछ पूर्व चेक खिलाड़ी और विदेशी कोच शामिल हो सकते हैं। संघ का लक्ष्य एक ऐसे कोच को नियुक्त करना है जो टीम को यूरो 2024 के लिए क्वालीफाई करा सके और दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित कर सके।
कौबेक के जाने से चेक फुटबॉल में एक नए युग की शुरुआत हो सकती है। टीम के पास प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, लेकिन उन्हें सही दिशा देने की जरूरत है। नए कोच के लिए यह एक बड़ी चुनौती होगी, लेकिन अगर सही चयन हुआ तो चेक टीम फिर से अपने पुराने गौरव को हासिल कर सकती है।
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