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एनएचएस मातृत्व सेवाओं में सुधार की मांग: जांच में नस्लवाद और भेदभाव की पुष्टि

BBC News — Health
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इंग्लैंड की मातृत्व सेवाओं की एक स्वतंत्र जांच में पाया गया है कि 'अस्वीकार्य नस्लवाद और भेदभाव' मरीजों की सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है। यह जांच कई वर्षों से चली आ रही शिकायतों और घटनाओं के बाद की गई थी, जिसमें अश्वेत और अल्पसंख्यक महिलाओं के साथ खराब व्यवहार की बात सामने आई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये मुद्दे केवल व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संस्थागत और प्रणालीगत हैं। जांच ने सिफारिश की है कि एनएचएस को तत्काल सुधार करने चाहिए ताकि सभी महिलाओं को समान और सुरक्षित देखभाल मिल सके।

रिपोर्ट में विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है जहां नस्लीय असमानताएं सबसे अधिक स्पष्ट हैं, जैसे कि गर्भावस्था के दौरान देखभाल, प्रसव के दौरान सहायता, और प्रसवोत्तर सेवाएं। जांच में पाया गया कि अश्वेत महिलाओं की मृत्यु दर श्वेत महिलाओं की तुलना में चार गुना अधिक है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। इसके अलावा, दक्षिण एशियाई मूल की महिलाओं को भी असमान देखभाल का सामना करना पड़ता है। जांच ने यह भी पाया कि भाषा और सांस्कृतिक बाधाएं अक्सर प्रभावी संचार में बाधा डालती हैं, जिससे गलत निदान और देरी होती है।

जांच ने एनएचएस के नेतृत्व की आलोचना की है, यह कहते हुए कि वे वर्षों से इन मुद्दों को संबोधित करने में विफल रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 'हम इसी तरह जारी नहीं रह सकते' और तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। सिफारिशों में शामिल है कि सभी मातृत्व कर्मचारियों के लिए अनिवार्य नस्लवाद-विरोधी प्रशिक्षण, अधिक विविध कार्यबल की भर्ती, और मरीजों की शिकायतों को गंभीरता से लेने के लिए एक नई प्रणाली। जांच ने यह भी सुझाव दिया कि मातृत्व सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डेटा संग्रह और रिपोर्टिंग में सुधार किया जाए।

इस रिपोर्ट का स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में व्यापक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। कई विशेषज्ञों ने इसे 'एक महत्वपूर्ण मोड़' बताया है, जो एनएचएस को अपनी प्रथाओं पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करेगा। हालांकि, कुछ आलोचकों का कहना है कि सिफारिशें पर्याप्त नहीं हैं और अधिक कठोर उपायों की आवश्यकता है। मरीज अधिकार समूहों ने रिपोर्ट का स्वागत किया है, लेकिन चेतावनी दी है कि बिना ठोस कार्रवाई के यह सिर्फ एक और दस्तावेज बनकर रह जाएगा।

एनएचएस ने रिपोर्ट के निष्कर्षों को स्वीकार किया है और कहा है कि वे सिफारिशों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ये बदलाव कितनी जल्दी होंगे और क्या वे वास्तव में प्रणालीगत समस्याओं को हल कर पाएंगे। जांच ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक शुरुआत है, और निरंतर निगरानी और मूल्यांकन की आवश्यकता होगी। इस बीच, महिलाएं और परिवार उम्मीद कर रहे हैं कि यह रिपोर्ट अंततः उन बदलावों की ओर ले जाएगी जिनकी वे लंबे समय से मांग कर रहे हैं।

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