
पांच महीने पुरानी स्टार्टअप कंपनी ऑर्बिटल ने संघीय संचार आयोग (FCC) से 100,000 तक डेटा सेंटर उपग्रहों को तैनात करने की अनुमति मांगी है। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष से 10 गीगावॉट कंप्यूटिंग शक्ति लाकर बढ़ती कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मांग को पूरा करना है। यह कदम अंतरिक्ष-आधारित कंप्यूटिंग की दिशा में एक महत्वाकांक्षी छलांग है।
कंपनी का मानना है कि पृथ्वी पर डेटा केंद्रों की ऊर्जा खपत और भूमि की कमी को देखते हुए, अंतरिक्ष में डेटा केंद्र स्थापित करना एक व्यवहार्य विकल्प हो सकता है। ऑर्बिटल के अनुसार, ये उपग्रह सूर्य की ऊर्जा का उपयोग करके संचालित होंगे और पृथ्वी की तुलना में अधिक दक्षता प्रदान कर सकते हैं। हालांकि, इस परियोजना को कई तकनीकी और नियामक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
FCC के पास दाखिल आवेदन में ऑर्बिटल ने अपने उपग्रहों के लिए एक विस्तृत योजना प्रस्तुत की है, जिसमें कक्षीय स्लॉट और आवृत्ति आवंटन शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि ये उपग्रह पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थित होंगे और एक दूसरे से लेजर लिंक के माध्यम से जुड़े होंगे। इससे एक वैश्विक नेटवर्क बनेगा जो डेटा प्रोसेसिंग को विकेंद्रीकृत करेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की परियोजना अभूतपूर्व है, लेकिन इसमें कई जोखिम भी हैं। अंतरिक्ष मलबा, उपग्रहों की विश्वसनीयता, और लागत प्रमुख चिंताएं हैं। ऑर्बिटल ने अभी तक अपने उपग्रहों के निर्माण या प्रक्षेपण के लिए कोई ठोस समयरेखा नहीं दी है। कंपनी ने केवल इतना कहा है कि वह अगले कुछ वर्षों में एक प्रोटोटाइप लॉन्च करने की योजना बना रही है।
यदि ऑर्बिटल की योजना सफल होती है, तो यह AI और क्लाउड कंप्यूटिंग उद्योग में क्रांति ला सकती है। अंतरिक्ष-आधारित डेटा केंद्र न केवल ऊर्जा दक्षता में सुधार कर सकते हैं, बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों में भी कंप्यूटिंग संसाधन प्रदान कर सकते हैं। हालांकि, अभी यह देखना बाकी है कि नियामक और तकनीकी बाधाओं को कैसे पार किया जाएगा।
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