उज़्बेकिस्तान 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध पर विचार कर रहा है

उज़्बेकिस्तान सरकार ने हाल ही में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों द्वारा सोशल मीडिया का उपयोग करने पर कानूनी प्रतिबंध लगाने की योजना की घोषणा की है। यह कदम मध्य एशियाई देशों में डिजिटल युग में किशोरों की सुरक्षा को लेकर बढ़ते चिंता के संदर्भ में उठाया गया है। प्रीस्कूल और स्कूल शिक्षा मंत्री ईज़ोज़खोन करिमोवा ने इस प्रस्ताव का खुलासा करते हुए बताया कि यह विचार अब गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार बच्चों से स्मार्टफोन छीनने के पक्ष में नहीं है, बल्कि उनके उपयोग पर नियंत्रण और जिम्मेदारी लाने पर जोर दे रही है। इस कदम के पीछे ऑनलाइन हानिकारक सामग्री, साइबर बुलिंग और अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बच्चों को बचाना मुख्य उद्देश्य है।
करिमोवा ने बताया कि मंत्रालय ने इस मुद्दे पर संसद के सदस्यों और सदन के साथ चर्चा की है और एक मसौदा कानून तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह मसौदा कानून जनता की राय जानने के लिए सार्वजनिक चर्चे के लिए रखा जाएगा, जिससे नागरिकों को इस नीति पर अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि तकनीक के इस युग में बच्चों से फोन छीना संभव नहीं है, लेकिन उनके उपयोग की एक संस्कृति और सीमाएं होनी चाहिए। वर्तमान में स्कूलों में छात्रों को फोन जमा करने का नियम है, लेकिन इसके कार्यान्वयन में असमानता देखी गई है।
उज़्बेकिस्तान के इस प्रस्ताव का समान संदर्भ मध्य एशिया के अन्य पड़ोसी देशों में भी देखा जा सकता है, जहां वही चिंताएं साझा की जा रही हैं। कजाकिस्तान ने भी हाल ही में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत करने पर प्रतिबंध लगाने के लिए विधेयक प्रस्तावित किया है। कजाख अधिकारियों का मानना है कि इससे हिंसा और अश्लील सामग्री जैसे हानिकारक प्रभावों से बच्चों की रक्षा होगी और साइबर बुलिंग में कमी आएगी। उन्होंने यह भी बताया कि 2025 में लगभग 200 साइबर बुलिंग के मामले दर्ज किए गए थे, जिसने नियमन को सख्त करने का दबाव बनाया है।
तजाकिस्तान में भी पिछले साल इसी विषय पर बहस हुई थी, जहां 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध और 14 से 17 वर्ष की आयु के लिए माता-पिता की लिखित सहमति की आवश्यकता का प्रस्ताव रखा गया था। समर्थकों का तर्क है कि कठोर नियंत्रण बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचा सकते हैं, जबकि आलोचकों का मानना है कि डिजिटल साक्षरता और माता-पिता की भागीदारी अधिक प्रभावी होगी। उज़्बेकिस्तान ने अभी तक कोई आधिकारिक मसौदा कानून प्रकाशित नहीं किया है, लेकिन करिमोवा ने संकेत दिया है कि विधायी विचार के लिए इसे पहले सार्वजनिक चर्चा से गुजारा जाएगा।
अंत में, यह उल्लेखनीय है कि उज़्बेकिस्तान का प्रयास केवल प्रतिबंध लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कानूनी सुरक्षा और मजबूत कार्यान्वयन के माध्यम से जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना भी है। सरकार यह मानती है कि मौजूदा नियमों को कुछ स्थानों पर लागू किया जाता है लेकिन अन्यत्र नहीं, इसलिए एक समग्र कानूनी ढांचे की आवश्यकता है। इस प्रक्रिया में सार्वजनिक सहभागिता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, क्योंकि अंतिम नीति का उद्देश्य बच्चों के डिजिटल अधिकारों और उनकी सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करना है।
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