भारत के साथ गतिरोध के बीच पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि सम्मेलन की मेजबानी की

पाकिस्तान मंगलवार को सिंधु जल संधि (IWT) पर एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जिसमें जल और अंतर्राष्ट्रीय कानून के स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ एकत्रित होंगे। इस्लामाबाद इस सम्मेलन के माध्यम से भारत द्वारा दशकों पुराने जल-साझाकरण समझौते को निलंबित करने के खिलाफ अपना मामला मजबूत करना चाहता है। यह संधि 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हस्ताक्षरित हुई थी और दोनों देशों के बीच जल विवादों को सुलझाने का मुख्य आधार रही है।
भारत ने हाल ही में संधि के तहत अपने दायित्वों को निलंबित करने की घोषणा की, जिससे पाकिस्तान में चिंता बढ़ गई है। पाकिस्तान का तर्क है कि यह कदम अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और इससे क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा है। सम्मेलन में विशेषज्ञ संधि के कानूनी पहलुओं और जल सुरक्षा पर इसके प्रभाव पर चर्चा करेंगे।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा कि वे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। उनका मानना है कि भारत का कदम न केवल संधि बल्कि क्षेत्रीय शांति के लिए भी खतरा है। सम्मेलन में विभिन्न देशों के राजनयिक और जल विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
सिंधु जल संधि को अक्सर अंतर्राष्ट्रीय जल विवादों के समाधान के लिए एक मॉडल के रूप में उद्धृत किया जाता है। यह संधि सिंधु नदी प्रणाली के पानी के बंटवारे को नियंत्रित करती है, जो दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का कहना है कि संधि का उल्लंघन गंभीर परिणाम ला सकता है।
इस सम्मेलन का उद्देश्य पाकिस्तान के रुख को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर मजबूत करना है। पाकिस्तान चाहता है कि विश्व बैंक और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं इस मामले में हस्तक्षेप करें। सम्मेलन के नतीजों से आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच जल विवाद की दिशा तय हो सकती है।
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