
यूक्रेन पर रूसी आक्रमण का 1588वां दिन है, और इस संघर्ष के दौरान रूसी सरकार पश्चिमी समाजों को यह विश्वास दिलाने में लगी हुई है कि यूक्रेन के पास किसी भी तरह की प्रतिरोध क्षमता नहीं है।
रूस का मुख्य उद्देश्य यह दिखाना है कि यूक्रेन पर आक्रमण का कोई अर्थ नहीं है और वहां की सेना या जनता लंबे समय तक खड़े नहीं रह सकती, जिससे पश्चिमी देशों को लगने लगे कि सहायता देना व्यर्थ है।
इस मनोवैज्ञानिक युद्ध के माध्यम से रूस यह संदेश देना चाहता है कि यूक्रेन की प्रतिरोध क्षमता केवल दिखावे की है और वास्तव में वे जल्द ही हार मान लेंगे, इसलिए आगे की लड़ाई निरर्थक है।
पश्चिमी देशों और उनके नागरिकों को यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य और आर्थिक मदद का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और अंततः रूस अपनी जीत हासिल कर लेगा।
इस प्रकार, रूसी प्रचार तंत्र लगातार यह प्रयास कर रहा है कि यूक्रेन के प्रतिरोध को कमजोर दिखाया जाए ताकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मदद की राह में रुकावटें खड़ी की जा सकें और संघर्ष का अंत रूस के पक्ष में हो।
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