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सिंध जल संकट: सीडा अध्यक्ष ने आईआरएसए प्रमुख को हटाने की मांग की

The Friday Times
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सिंधु नदी प्रणाली के पानी के बंटवारे को लेकर सिंध प्रांत और संघीय संस्था आईआरएसए के बीच तनाव बढ़ गया है। सिंध इरिगेशन एंड ड्रेनेज अथॉरिटी (सीडा) के अध्यक्ष कबूल मोहम्मद खटियान ने आरोप लगाया है कि आईआरएसए ने जानबूझकर सिंध के हिस्से के सिंचाई जल प्रवाह को कम कर दिया है। उन्होंने इस कथित कमी को सिंध के किसानों और कृषि के लिए गंभीर खतरा बताया। खटियान ने मांग की है कि आईआरएसए के अध्यक्ष को तुरंत पद से हटाया जाए ताकि पानी के उचित वितरण को सुनिश्चित किया जा सके। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब सिंध में पानी की भारी कमी है और फसलें चरमरा रही हैं।

सिंध प्रांत लंबे समय से नदी के पानी के अपने हिस्से को लेकर शिकायत करता रहा है। आईआरएसए (इंडस रिवर सिस्टम अथॉरिटी) चार प्रांतों के बीच पानी के बंटवारे की निगरानी करती है। सिंध सरकार का आरोप है कि आईआरएसए पंजाब के पक्ष में पक्षपात करता है और सिंध को उसका हक नहीं देता। इस बार खटियान का बयान और भी तीखा है क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर आईआरएसए प्रमुख को हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि आईआरएसए प्रमुख की निष्क्रियता और पक्षपात के कारण सिंध में पानी का संकट और गहरा गया है।

सिंध में पानी की कमी का सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। गेहूं, कपास और गन्ना जैसी प्रमुख फसलों की पैदावार घट रही है। कई इलाकों में नहरें सूखी पड़ी हैं और भूजल स्तर गिरता जा रहा है। किसानों को सिंचाई के लिए महंगे ट्यूबवेल पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे उनकी लागत बढ़ गई है। खटियान ने चेतावनी दी है कि अगर पानी का उचित वितरण नहीं हुआ तो सिंध में कृषि संकट और भयावह हो जाएगा।

इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। सिंध की सत्तारूढ़ पार्टी पीपीपी ने भी आईआरएसए के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार पर सिंध के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया है। वहीं, पंजाब सरकार का कहना है कि वह अपने हिस्से का पानी ही ले रही है और आईआरएसए नियमों के अनुसार काम कर रहा है। यह विवाद संघीय ढांचे में प्रांतीय अधिकारों और संसाधनों के बंटवारे के बड़े सवाल को उठाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पानी के बंटवारे का यह विवाद जलवायु परिवर्तन के कारण और गहरा सकता है। ग्लेशियरों के पिघलने और अनियमित वर्षा के कारण सिंधु नदी में पानी की उपलब्धता अनिश्चित हो गई है। ऐसे में प्रांतों के बीच सहयोग और पारदर्शी तंत्र की जरूरत है। खटियान की मांग ने इस बहस को फिर से हवा दे दी है कि क्या आईआरएसए जैसी संस्थाएं निष्पक्ष रह सकती हैं या उनमें सुधार की जरूरत है।

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