
स्पेन में 'ले डे नीटोस' यानी नाती-पोतियों के कानून को लेकर सरकार और विपक्षी पीपी (पार्टिडो पॉपुलर) के बीच गहरा विवाद खड़ा हो गया है। यह कानून उन लोगों को स्पेनिश नागरिकता प्रदान करता है जो स्पेनिश मूल के हैं, लेकिन उनके पूर्वजों ने देश छोड़ दिया था। सरकार का कहना है कि यह एक अर्जित अधिकार है, जबकि पीपी का मानना है कि इससे चुनावी संतुलन बिगड़ सकता है।
पीपी को चिंता है कि इस कानून के तहत बड़ी संख्या में लोग नागरिकता प्राप्त करेंगे और आगामी चुनावों में वोट डालेंगे, जिससे उनकी पार्टी को नुकसान हो सकता है। पार्टी ने इस कानून को 'चुनावी धोखाधड़ी' करार दिया है और इसे रद्द करने की मांग की है। दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि यह कानून ऐतिहासिक अन्याय को सुधारता है और स्पेनिश प्रवासियों के वंशजों को उनका हक देता है।
यह विवाद तब और बढ़ गया जब पीपी ने संसद में इस कानून के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। सरकार ने इसे खारिज कर दिया और कहा कि वह कानून को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई, जिसमें सरकार ने पीपी पर 'अल्पसंख्यकों के अधिकारों का विरोध' करने का आरोप लगाया।
इस कानून के समर्थकों का कहना है कि यह स्पेनिश डायस्पोरा को एकजुट करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। उनका मानना है कि इससे स्पेन और लैटिन अमेरिकी देशों के बीच संबंध मजबूत होंगे। विरोधियों का तर्क है कि इससे स्पेन की नागरिकता का अवमूल्यन होगा और चुनावी प्रक्रिया प्रभावित होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद स्पेन की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है। चुनाव नजदीक हैं और दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति पर अड़े हुए हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह कानून अंततः कैसे लागू होता है और इसका चुनावी परिणामों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
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