
पुर्तगाली वास्तुकार सूतो डी मौरा को अंतर्राष्ट्रीय वास्तुकार संघ (UIA) के सर्वोच्च सम्मान, स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार वास्तुकला के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देता है। सूतो डी मौरा 2011 में प्रित्ज़कर पुरस्कार जीतने वाले प्रसिद्ध वास्तुकार हैं। वह यह प्रतिष्ठित पदक प्राप्त करने वाले दूसरे पुर्तगाली बने हैं, इससे पहले अल्वारो सिज़ा विएरा को यह सम्मान मिला था। यह घोषणा वास्तुकला जगत में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।
सूतो डी मौरा का जन्म 1953 में पोर्टो, पुर्तगाल में हुआ था। उन्होंने पोर्टो विश्वविद्यालय के ललित कला संकाय से वास्तुकला में स्नातक किया। उनके काम की विशेषता आधुनिकता और परंपरा का अनूठा मिश्रण है। वह अपनी इमारतों में स्थानीय सामग्रियों और संदर्भों का उपयोग करने के लिए जाने जाते हैं। उनकी परियोजनाओं में पोर्टो में कासा दास आर्टेस, ब्रागा में नगर पुस्तकालय और लिस्बन में पुर्तगाली वास्तुकला संग्रहालय शामिल हैं।
UIA स्वर्ण पदक हर तीन साल में दिया जाता है और यह वास्तुकला के क्षेत्र में सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक है। यह पुरस्कार उन वास्तुकारों को दिया जाता है जिन्होंने वैश्विक स्तर पर वास्तुकला के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सूतो डी मौरा को यह पुरस्कार उनके समकालीन वास्तुकला में नवाचार और मानवीय मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता के लिए दिया गया है।
अल्वारो सिज़ा विएरा, जिन्होंने 1992 में प्रित्ज़कर पुरस्कार जीता था, 2011 में UIA स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले पहले पुर्तगाली थे। सूतो डी मौरा को यह पदक मिलना पुर्तगाली वास्तुकला की वैश्विक पहचान को दर्शाता है। दोनों वास्तुकार पोर्टो स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर से जुड़े हैं, जो अपनी विशिष्ट शैली के लिए जाना जाता है।
यह पुरस्कार न केवल सूतो डी मौरा के करियर की उपलब्धि है, बल्कि पुर्तगाली वास्तुकला के लिए भी गर्व का क्षण है। उनके काम ने दुनिया भर के वास्तुकारों को प्रेरित किया है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल कायम की है। यह सम्मान वास्तुकला में उत्कृष्टता और रचनात्मकता के महत्व को रेखांकित करता है।
इस खबर के बारे में पूछें
उत्तर केवल इस खबर से AI द्वारा।
यह एआई द्वारा बनाया गया संक्षिप्त सारांश है। पूरी खबर स्रोत पर है।
स्रोत पर पूरी खबर पढ़ेंobservador.pt