
अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और पूर्व वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर कतर की राजधानी दोहा में कतरी प्रधानमंत्री से ईरान परमाणु समझौते पर चर्चा करने वाले हैं। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है। विटकॉफ और कुशनर दोनों ही पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी रहे हैं और ईरान नीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। कतर ने हाल के वर्षों में ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की है, जिसमें परमाणु वार्ता भी शामिल है। इस बैठक का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर एक नए समझौते की संभावना तलाशना है।
कतरी प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने पहले भी ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में मध्यस्थता की है। वे क्षेत्रीय कूटनीति में एक प्रमुख व्यक्ति हैं और उन्होंने कई बार ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की है। विटकॉफ और कुशनर की यात्रा से संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ एक नए समझौते पर पहुंचने के लिए गंभीर प्रयास कर रहा है। हालांकि, ईरान ने अभी तक इस बैठक पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक ईरान और अमेरिका के बीच तनाव को कम करने में मददगार साबित हो सकती है।
ईरान परमाणु समझौता, जिसे जेसीपीओए के नाम से जाना जाता है, 2015 में हस्ताक्षरित हुआ था लेकिन 2018 में ट्रंप प्रशासन ने इससे बाहर निकलने का फैसला किया। तब से ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाया है और यूरेनियम संवर्धन का स्तर बढ़ा दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत नहीं हो रही है, लेकिन कतर और ओमान जैसे देश मध्यस्थता कर रहे हैं। विटकॉफ और कुशनर की यह यात्रा इस मध्यस्थता प्रक्रिया का हिस्सा है।
कुशनर, जो ट्रंप के दामाद हैं, ने मध्य पूर्व शांति योजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने इब्राहिम समझौते में भी योगदान दिया था, जिसमें इज़राइल और कई अरब देशों के बीच संबंध सामान्य हुए थे। विटकॉफ एक रियल एस्टेट डेवलपर हैं और उन्हें मध्य पूर्व मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। दोनों की संयुक्त उपस्थिति इस बात का संकेत है कि ट्रंप प्रशासन ईरान मुद्दे को हल करने के लिए अपने सबसे भरोसेमंद लोगों को भेज रहा है।
यह बैठक दोहा में होगी, जो क्षेत्रीय कूटनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। कतर ने अफगानिस्तान शांति वार्ता और अन्य संघर्षों में भी मध्यस्थता की है। अगर यह बैठक सफल रहती है, तो यह ईरान और अमेरिका के बीच एक नए समझौते की नींव रख सकती है। हालांकि, अभी भी कई चुनौतियां हैं, जिनमें ईरान की मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय प्रभाव शामिल हैं। फिर भी, यह कूटनीतिक प्रयास एक सकारात्मक कदम है।
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