सांसद ने कहा, 'मैं वैज्ञानिक नहीं हूं', इंटरसेक्स लोगों को छोड़ने वाले विधेयक का बचाव किया

न्यूज़ीलैंड फर्स्ट पार्टी की सांसद जेनी मार्क्रॉफ्ट ने एक विवादास्पद विधेयक का बचाव किया है जो लिंग की परिभाषा को सीमित करता है और इंटरसेक्स न्यूज़ीलैंडवासियों को शामिल नहीं करता। उन्होंने कहा कि वह एक वैज्ञानिक नहीं हैं, लेकिन फिर भी इस कानूनी बदलाव को आगे बढ़ा रही हैं। इस विधेयक का उद्देश्य लिंग को केवल पुरुष और महिला तक सीमित करना है, जिससे इंटरसेक्स लोगों को कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी।
न्यूज़ीलैंड में हजारों लोग ऐसे हैं जो लिंग विशेषताओं में भिन्नता के साथ पैदा होते हैं, जिन्हें इंटरसेक्स कहा जाता है। मार्क्रॉफ्ट का तर्क है कि यह विधेयक महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह इंटरसेक्स समुदाय को हाशिए पर डालता है। उन्होंने स्वीकार किया कि वह इस मुद्दे पर विशेषज्ञ नहीं हैं, फिर भी वह इस कानून को आगे बढ़ाने पर अड़ी हैं।
इस विधेयक ने न्यूज़ीलैंड में व्यापक बहस छेड़ दी है, जहां एलजीबीटीक्यू+ अधिकारों को लेकर संवेदनशीलता है। कई मानवाधिकार संगठनों ने इस विधेयक की निंदा की है, इसे भेदभावपूर्ण और अवैज्ञानिक बताया है। उनका कहना है कि लिंग एक जटिल जैविक और सामाजिक अवधारणा है, जिसे सरल बाइनरी में नहीं बांधा जा सकता।
मार्क्रॉफ्ट ने अपने बयान में कहा कि वह वैज्ञानिक नहीं हैं, लेकिन उनका मानना है कि यह विधेयक महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह विधेयक इंटरसेक्स लोगों के अधिकारों का उल्लंघन करता है और उन्हें कानूनी रूप से अदृश्य बना देता है। यह विवाद न्यूज़ीलैंड की संसद में गरमागरम बहस का कारण बना हुआ है।
इस विधेयक के पारित होने की संभावना अनिश्चित है, लेकिन यह न्यूज़ीलैंड में लिंग और पहचान के मुद्दों पर चर्चा को फिर से जीवित कर देता है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार को इंटरसेक्स लोगों को शामिल करने के लिए कानून में संशोधन करना चाहिए, न कि उन्हें बाहर करना चाहिए। यह मामला न्यूज़ीलैंड के सामाजिक ताने-बाने में गहरे विभाजन को उजागर करता है।
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