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सुप्रीम कोर्ट का फैसला: फेडरल रिजर्व एक अनोखी एजेंसी है, लिसा कुक के वकील ने कहा

PBS NewsHour
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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 5-4 के बहुमत से फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पास फेडरल रिजर्व बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की सदस्य लिसा कुक को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है। यह फैसला फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। लिसा कुक के प्रमुख वकील एब्बे लोवेल ने इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि यह साबित करता है कि फेडरल रिजर्व एक अनोखी संघीय एजेंसी है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने राष्ट्रपति की शक्तियों पर एक महत्वपूर्ण सीमा निर्धारित की है। न्यायालय ने माना कि फेडरल रिजर्व जैसी स्वतंत्र एजेंसियों के सदस्यों को मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकता। यह फैसला पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा लिसा कुक को हटाने के प्रयास के बाद आया है। लोवेल ने कहा कि यह निर्णय फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता और मौद्रिक नीति की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।

लिसा कुक एक अर्थशास्त्री हैं और उन्हें 2022 में राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा फेडरल रिजर्व बोर्ड में नियुक्त किया गया था। वह बोर्ड की पहली अश्वेत महिला सदस्य हैं। ट्रम्प प्रशासन ने उन्हें हटाने का प्रयास किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार दिया। इस फैसले ने फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को बनाए रखने में मदद की है।

एब्बे लोवेल ने कहा कि यह फैसला फेडरल रिजर्व की अनूठी स्थिति को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि फेडरल रिजर्व को राजनीतिक दबाव से मुक्त रखना आवश्यक है ताकि वह प्रभावी मौद्रिक नीति संचालित कर सके। यह फैसला भविष्य में राष्ट्रपतियों द्वारा स्वतंत्र एजेंसियों में हस्तक्षेप के प्रयासों को रोकने में मदद करेगा।

इस फैसले का व्यापक राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को मजबूत करेगा और मुद्रास्फीति नियंत्रण जैसी नीतियों में स्थिरता लाएगा। हालांकि, कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने इस फैसले की आलोचना की है, इसे राष्ट्रपति की शक्तियों पर अनुचित प्रतिबंध बताया है।

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